लो अपना जहाँ दुनिया वलों,
जो रिश्ते नाते जोरे थे वो,
रिश्ते नाते तोर चलें !

कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुःख के सदमे झेल चले !
तकदीर की आंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाय अब खेल चले!
हर चीचें तुम्हारी लोटादी, हम
लेके नहीं कुछ साथ चले!
फिर दोष ना देना,ए लोगों
हम देख लो अब खली हाथ चले!
ये राह अकेले कटती है,
यहाँ साथ ना कोई यार चले!
उस पार ना जाने क्या पायें,
इस पार तुझे सब हार चले !
लो अपना जहाँ ये दुनिया वालों,
फिर दोष ना देना ऐ -लोगों !!!
ये दोस्त लो अब तुम्हे छोर चले,
बस अब तेरी यादें हम ले चले !
पर साथ ना कोई यार चले.....!
Mishra............................!
हम इस दुनिया को छोर चलें !
रिश्ते नाते तोर चलें !

कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुःख के सदमे झेल चले !
तकदीर की आंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाय अब खेल चले!
हर चीचें तुम्हारी लोटादी, हम
लेके नहीं कुछ साथ चले!
फिर दोष ना देना,ए लोगों
हम देख लो अब खली हाथ चले!
ये राह अकेले कटती है,
यहाँ साथ ना कोई यार चले!
उस पार ना जाने क्या पायें,
इस पार तुझे सब हार चले !
लो अपना जहाँ ये दुनिया वालों,
फिर दोष ना देना ऐ -लोगों !!!
ये दोस्त लो अब तुम्हे छोर चले,
बस अब तेरी यादें हम ले चले !
पर साथ ना कोई यार चले.....!
Mishra............................!