Thursday, October 20, 2011

चाँद सी सनम अपनी ..............................................!!

ए सनम जिस खुदा ने तुझे चाँद सी सूरत दी है,
उसी खुदा ने मुझ को भी तुमसे मोहब्बत दी है !!

दिल-व-जान, दीन-ओ-ईमान जो लेना है सनम लेलो,
करेंगे देर देने में ना हम, चाहो तो क़सम लेलो !!

मेरा जो दिल है सनम खानाः है हसीनो के
हज़ारों सूरतें हैं इसमें मगर एक बस्ती है !!

उलट दे ए सनम तू नकाब-ए-रुख को चेहरे से,
कभी तो देख लें हम जड़ा तुम्हारी सूरत!!

बला से जो दुश्मन हुआ है किसी का,
वो काफ़िर सनम क्या खुदा है किसी का!!
.................Mishra........................!!

Sunday, October 16, 2011

वफ़ा होती तो क्या होता ...........................................!!

कितने ही कठिन लम्हे आये मेरी हस्ती में,
अफ़सोस वफ़ा मेरी मुझ को ही न रास आई !!

हम को उनसे वफ़ा की है उम्मीद,
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है !!

कल तक तो आशना थे मगर आज ग़ैर हो,
दो दिन में यह मिज़ाज है आगे तो खैर हो !!

जब इतनी बेवफाई पर दिल उसको प्यार करता है,
तो या-रब वह सितमगर बा-वफा होता तो क्या होता !!
तेरी इसी बेवफाई पर फ़िदा होती है जान अपनी,
खुदा जाने अगर तुझमें वफ़ा होती तो क्या होता !!

सच्चे तो कोई ज़ात खुदा के सिवा नहीं,
बुत थे मज़े की चीज़ मगर बा-वफ़ा नहीं !!
..................
Mishra..........................!!

Saturday, October 8, 2011

सुनो ए चाँद सी लड़की.......! ...................................................................!!!

सुनो ए चाँद सी लड़की ....
अभी तुम तितलियाँ पकड़ो, 

या फिर गुड़ियों से खेलो तुम,
या फिर मासूम सी आँखों से,
ढेरों सारा ख्वाब देखो तुम !!

फ़र्ज़-ओ-फैज़-ओ-मोहसिन, 
की किताबें मत अभी पढना,  
ये सब शब्दों के साहिर हैं !! 


ये तुम्हें उल्झा के रख देंगी,
अभी तुम्हें मालूम ही कहां है !!

अभी तुम नहीं जानती ये मुहब्बत के शब्दों में 
हवस और हिज्र होती है, जो तुम्हे तोड़ देगी !
 ऐ चाँद सी लड़की ........

ये इंसानों की बनाई दुनियां है,
मगर इन से कहीं बढ़ कर
यहाँ वहशी-दरिन्दे बस्तें हैं !

ये वो वहशी-दरिन्दे की बस्ती हैं,
जिन की आँखों में मचलते प्यार हैं!


मगर इस मचलते प्यार के पीछे, 
हवस और हिज्र के शिवा कुछ नहीं होता है !


प्यार तो सिर्फ इनके आँखों में होता है दिखाने के लिए,
अभी तुम नहीं जानते इन्हें, अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है !!


तुम्हे क्या पता हवस और प्यार के बीच की वो संगीन दूरियां,
ऐ चाँद सी लड़की अभी दूर ही रहो इस दुनिया से तुम !!
 

अभी काची कली हो तुम,
अभी काँटों से मत खेलो!! 

अभी अपनी हथेली पर,
किसी का नाम मत लिखो !!

अभी अपनी किताबों में,
गुलाबी पंखरियाँ मत रखो !
  
अभी शेरों-सायरी में मत उलझो तुम, 
अभी तो तुम्हारी सारी उम्र बांकी है !!

अभी तो तुम्हारे दुपट्टे सम्मभालनें के दिन हैं,
अभी से इसे मत गिराओ तुम, ऐ चाँद सी लड़की 
अभी खुद को सम्भालो तुम !!  

अभी मत गुनगुनाओ तुम, 
अभी मत सुनाओ तुम !!


अभी से इश्क मत सोचो तुम,
अभी तुम्हारी उम्र क्या है,
ऐ चाँद सी लड़की  !!


अभी मत जागो रातों को, ये रात बहुत तन्हा होती है,
ये तुम्हे तन्हाईयों के सिवा कुछ और क्या देगा !!


चन्द तारों के भीड़ में तुम्हे लगेगा सकूँ मिल रहा है,
मगर तुम अभी क्या जानो, ये तन्हा तारें तुम्हे और तन्हा कर देगा !


जा के पूछो किसी मुहब्बत करने वालों से,ऐ चाँद सी लड़की,
अभी मत जागों रातों को ,ऐ चाँद सी लड़की !!


अभी तुम क्या जानती हो मुहब्बत की दुनियां को,
जा के पूछो इस दुनियां में रहने वालों को, ये
दुनिया वाहर से जितनी तुम्हे रंगीन दिखती है,
उतनी ही ये उल्ल्झी है गमें-सीत्म्मगीरी से !!


ऐ चाँद सी लड़की अभी तुम दूर ही रहो,
इस मुहब्बत की दुनियां से अभी उम्र ही क्या है !!
   
अबी सब भूल जाओ तुम, 
सुनो ऐ चाँद सी लड़की  !!


..........Mishra...........!!


This post is dedicated to
one of my good friend!
Now days she's searching 
4true love..........!!

Thursday, September 22, 2011

क्या दिन थे मोहब्बत के ......................!! ........................................................

...........Love Never Die........ 
अजब दिन थे मोहब्बत के
वो अजब दिन थे रफ़ाक़त(Closeness)के,

कभी अगर याद आ जायें तो
पलकों पे सितारे झिल्मीलाते हैं !

किसी की याद में रात को अक्सर
जागना मांमुल था अपना ,

कभी अगर नींद आ भी जाती,तो
हम ये सोच लेते थे,अभी तो वो

हमारे वास्ते रोया नहीं होगा
अभी तो सोया नहीं होगा !
अभी हम भी नहीं रोते,
अभी हम भी नहीं सोते,

और फिर हम जागते थे,
और उसको याद करते थे !

अकेले बैठ कर वीरान दिल आवाद करते थे !

हमारे सामने तारों की झुरमुट में,
अकेला चाँद होता था,जो उसके
हुस्न के आगे बहुत ही माद(feeka) होता था !
पलक पर रस्क करते अन्गिनत रौशन सितारों को,

जो हम तर्तीब(combine)देते थे, तो उसका नाम बनता था !

हम अगले रोज जब मिलते थे, तो
गुजरे रात की हर वे-कली का जिक्र करते थे,
हर एक किस्सा सुनाते थे !

कहाँ किस वक़्त किस तरह से,
दिल धड़का तुम्हे याद करके बताते थे !

मैं जब कहता की जाना ,आज तो
मैं रात को एक पल भी नहीं सोया,
तो वो बीना कुछ कहे खामोश रहती थी!

पर उसकी नींद में डूबी दो झील सी आँखे,
अचानक बोल उठती थी , की तुम झूठ कहते हो!

मैं जब उसको बताता था,की मैंने
रात के रौशन सीतारों में तुम्हारा नाम देखा है,तो

वो कहती तुम झूठ कहते हो, सितारें तो मैंने देखी थी,
और उसमे तुम्हारा नाम लिखा देखा था !

क्या अजब मासूम लड़की थी
मुझे कहती थी लगता है, अब
अपने सितारें मिल ही जायेंगे !

मगर उसको क्या खबर थी ?
किनारे मिल नहीं सकती ,
मोहब्बत के कहानी में !

मोहब्बत करने वालों के,
सितारें मिल नहीं सकते,
मोहब्बत की कहानी में !

मगर मुझे मालूम है की
मोहब्बत करने वालों के,
सितारें कभी मुरझा नहीं सकते,
मोहब्बत की कहानी में !!!

क्या वो अजब मासूम लड़की थी !!
..........Mishra......................!!!
































Wednesday, August 24, 2011

बात चली तेरी आँखों से ...!!

बात चली तेरी आँखों से 
जा पहुंची पैमाने तक !

खींच रही है तेरी उल्फत 
आज मुझे मैख़ाने तक !

इश्क की बातें गम की बातें
दुनया वाले करते हैं  !

किसने शम्मा का दुःख देखा 
कोन गया परवाने तक !

इश्क नहीं है तुम को मुझसे 
सिर्फ इश्क के बहाने करती हो !
  
यूं ही बहाने कायम रखना 
तुम मेरे मर जाने तक !

इतना ही कहना है तुमसे 
मुमकिन हो तो आ जाना!
  
अब आही गये तो रुकना होगा 
आँखों के पथराने तक !

बात चली तेरी आँखों से!
जा पहुंची पैमाने तक !
....................Mishra !

Wednesday, June 1, 2011

जुदाई.......... !!

जुदा होके उनसे हम बिखर से गये,
बिखरे आंसू के मोती हम पिरो ना सके,
तेरी याद में सारी रात सो ना सके !


बह ना जाये आंसू में तस्वीर तेरी 
बस यही सोच कर हम रो ना सके !


वो मील जाते हैं कहानी बनकर 
दिल में बस जाते हैं निशानी बनकर! 


जिन्हें हम रखते हैं अपनी आखो में 
क्यूँ निकल जाते हैं वो पानी बनकर?


ख्यालों को किसी आह्ट की आस रहती है 
निगाहों को तेरी तलाश रहती है !


तेरे बिना कोई कमी नहीं लेकिन 
तेरे बगैर तबियत उदास रहती है! 


समझा ना कोई दिल की बात को, 
दर्द दुनिया ने बिन सोचे ही दे दिया! 


सह गए जो हम अगर दर्द को चुपके से,
तो फिर हमको पत्थर दिल कह दिया! 


अगर हम ना होते तो गज्ज़ल कोन कहता,
आपके चेहरे को कोमल कोन कहता !


ये तो करिश्मा है मोहब्बत का,
वर्ना पत्थर को ताज-महल कोन कहता! 


दर्द से दोस्ती हो गयी यारों, 
ज़िन्दगी बेदर्द हो गयी यारों ! 


क्या हुआ जो जल गया आशियाना हमारा, 
दूर तक रौशनी तो हो गयी यारों !
........................Mishra......................................!

Saturday, April 30, 2011

Last day of my college......

लो अपना जहाँ दुनिया वलों,
हम इस दुनिया को छोर चलें !

जो रिश्ते नाते जोरे थे वो,
रिश्ते नाते तोर चलें !



कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुःख के सदमे झेल चले !


तकदीर की आंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाय अब खेल चले!


हर चीचें तुम्हारी लोटादी, हम
लेके नहीं कुछ साथ चले!


फिर दोष ना देना,ए लोगों
हम देख लो अब खली हाथ चले!


ये राह अकेले कटती है,
यहाँ साथ ना कोई यार चले!


उस पार ना जाने क्या पायें,
इस पार तुझे सब हार चले !


लो अपना जहाँ ये दुनिया वालों,
फिर दोष ना देना ऐ -लोगों !!! 


ये दोस्त लो अब तुम्हे छोर चले,
बस अब तेरी यादें हम ले चले !
पर साथ ना कोई यार चले.....!
Mishra............................!