Saturday, April 30, 2011

Last day of my college......

लो अपना जहाँ दुनिया वलों,
हम इस दुनिया को छोर चलें !

जो रिश्ते नाते जोरे थे वो,
रिश्ते नाते तोर चलें !



कुछ सुख के सपने देख चले,
कुछ दुःख के सदमे झेल चले !


तकदीर की आंधी गर्दिश ने,
जो खेल खिलाय अब खेल चले!


हर चीचें तुम्हारी लोटादी, हम
लेके नहीं कुछ साथ चले!


फिर दोष ना देना,ए लोगों
हम देख लो अब खली हाथ चले!


ये राह अकेले कटती है,
यहाँ साथ ना कोई यार चले!


उस पार ना जाने क्या पायें,
इस पार तुझे सब हार चले !


लो अपना जहाँ ये दुनिया वालों,
फिर दोष ना देना ऐ -लोगों !!! 


ये दोस्त लो अब तुम्हे छोर चले,
बस अब तेरी यादें हम ले चले !
पर साथ ना कोई यार चले.....!
Mishra............................!

Tuesday, February 8, 2011

आओ तो सही .........................


आओ तो  कभी  देखो  तो  जरा 
हम  कैसे  जिए  तेरी  खातीर!
दिन रात जलाये बैठे हैं 
आँखों के दिए तेरी खातीर!

आओ तो कभी देखो तो जरा 
हम कैसे जिए तेरी खातीर!
....................................
एक नाता तुझसे जोर लिया 
सब अपनों से मुह मोड़ लिया!

हम तन्हा होकर बैठ गए 
सब छोर दिए तेरी खातीर!

आओ तो कभी देखो तो जरा
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
........
कुछ आहें थी कुछ सीक्वे थे
होंठों पर जिन्हें आने ना दिया !

जो आँख के रस्ते भी आये  
सब अस्क पीये तेरी खातीर !

आओ तो कभी देखो तो जरा 
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
.........
बदनाम ना तू हो जाये कहीं 
इन अपनी जफवों के बदले !

बिन तेरे गमो पे खुशओं के   
सों(100) परदे किये तेरी खातीर !

आओ तो कभी देखो तो जरा
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
..........
मेरे खूने जिगर का दाग कहीं  
दामन पे तेरे ना लग जाये कहीं !

एक एहदे वफ़ा के धागे से
सब ज़ख्म सिये तेरी खातीर ! 

आओ तो कभी देखो तो जरा 
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
.............
हम सब कुछ अपना हार गए 
बर्वाद हुए पर तू ना मीला !

बेकार जहाँ में जीने के  
इल्जाम लीए तेरी खातीर ! 

आओ तो कभी देखो तो जरा 
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
दिन  रात जलाये बैठे हैं 
आँखों क दिए तेरी खातीर !

आओ तो कभी देखो तो जरा 
हम कैसे जिए तेरी खातीर !
...........collection  ATTAULLA KHA................. !

Time & Luck.................

कभी नजरें मिलाने में ज़माने बीत जाते हैं
कभी नजरें चुराने में ज़माने बीत जाते हैं!

किसी ने आंख भी खोली तो सोने की नगरी में
कीसी को घर बनाने में ज़माने बीत जाते हैं!

कई काली सिआह रातें हमें इक पल की लगती हैं
कभी इक पल बिताने में ज़माने बीत जाते हैं!


कभी खुला दरवाज़ा खरी थी सामने मंजिल
कभी मंजिल को पाने में ज़माने बीत जाते हैं!


इक पल में टूट जाते हैं उमर भर के रिश्ते
वो रिश्ते जो बनाने में ज़माने बीत जाते हैं!

................Mishra............................

Monday, January 24, 2011

ALWAYS ....THINK +VE.........................

हम सभी जानते हैं की
इस संसार के लोग मतलबी हैं 
सब अपने ही बारे में सोचते हैं 
ओ जो भी हैं उन्हें प्यार करो !


अगर तुम अच्छा करोगे तो
लोग तुम्हें मतलबी कहेंगे 
जो भी कहें, लोग तुम्हें
तुम हमेशा अच्छा करो!


अगर तुम जीवन में कामयाब हो तो
तुम्हें बहूत छुट्टे दोस्त भी मिलेंगे 
कुछ दुश्मन भी मिलेंगे,मगर सच्चे मिलेंगे
जो भी हो और कामयाब बनो !


तुम्हारा आज का अछाई
कल भुला दिए जायेंगे ,
जो भी हो अच्छा करो !


तेरा ईमानदारी और खुलेपन से 
तुम्हारा लोग मजाक भी उड़ायेंगे 
जो भी हो इमानदार बनो !


बड़ा सोचने वाले बड़ा कहलाते हैं
छोटे लोगों की सोच भी छोटी ही होती है
इसलिए जो भी हो हमेशा बड़ा सोचो !


जो मंजिल तुमने कई रातों की नींद 
उड़ा कर वर्षों में खरा किये हो
शायद एक रात में ही गिर जाये
जो भी हो कभी हर ना मनो !


इस संस्सर में लोगों को
सही में मद्त चाहिए, उन्हें  
मद्त  करो तो शिकायत करेंगे
जो भी हो तुम उनकी मदद करो !


संसार को अपना कीमती वक़्त दो 
हो सकता है तुम्हे कुछ ना मिले
मगर जो भी हो संसार को अपना 
ओ सब दो जो तेरे पास है !

सिर्फ तुम्हारे लिए .....................................


जब से तुम्हे देखा है जी करता है
कुछ ना कुछ लिखूँ !


तेरे गालों पे लिखूँ 
चाहें बालों पे लिखूँ
तेरे लबों पे लिखूँ
चाहे नैनों पे लिखूँ !


मगर कुछ ना कुछ लिखूँ ऐसा,
जैसा किसी ने ना लिखा हो,
तुमहारे लिए !


तेरा चेहरा फूलों की तरह खूबसूरत है
तेरे होंठ गुलाब की पंखुड़ियों से नरम है
तेरे गालों के उभार, मानो छोटे-छोटे पर्वतों की शिखाएँ है
तेरी आँखे झीलों सी निर्मल,समुन्द्र सी गहरी है
तेरी बातों में एक अजब सी जादुगरी है !


मगर यह सब तो पहले ही लिख चुके हैं
बहुत से कवि, मैं तो लिखना चाहता हूँ
कुछ नया जो सिर्फ तुम्हारे लिए हो !


सिर्फ तुम्हारे लिए,
जैसे मैं हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए !


मगर जानें क्यूँ कुछ भी नहीं सूझ रहा
मेरी कलम भी आज खामोश है
शायद नहीं बचा अब कुछ भी नया
तुमहारे लिए !


या फिर
तुम्हे शब्दों में पीरों पाना संभव नहीं
कम से कम मेरे लिए !


मगर फिर भी मैं कोशिश करूंगा
कुछ ना कुछ नया लिखने की
तुम्हारे लिए !


क्योंकि मेरा जी करता है लिखूँ
कुछ ना कुछ नया
तुम्हारे लिए
सिर्फ तुम्हारे लिए !

DIL KI AWAZ>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

ये तो धड़कन का कसूर है,
जो जिन्दा होने का एहद कराती है !

मौत आये मुझे बरसो गुजरें,
बस यूँही सांस आती जाती है!


सैकड़ों खंजर हैं मेरी छाती में,
खूँ का कतरा नहीं है कोई मगर !


काश समझ पाते ये लोग यहाँ,
कलम स्याही कहाँ से लाती है ?


बैठे हैं यहाँ आज मेरी महफ़िल में,
इस शहर के समझदार कई ,
हर शेर पे बहुत खूब कहते हैं,
जाने कैसे इन्हें हर बात समझ आती है !


मेरा साया मुझको हर शाम एक वही पुराना सवाल दे जाता है,
सारा दिन मुट्ठी कस कर रखी थी बंद मैंने ये रेत कैसे सरक जाती है?
------------------------------------------MISHRA--------------------------------------------

Friday, December 31, 2010

ओ कैसी पागल लड़की है ...............................................................................

अजब पागल सी लड़की है 
मुझे हर ख़त मैं लिखती है !


मुझे तुम याद करते हो ?
तुम्हे मैं याद आती हूँ ?
मेरी बातें तुम्हे सताती हैं ?
मेरी नींदें जगाती  हैं  ?
मेरी आंखें रुलाती हैं  ?


जेष्ट की सुनहरी धूप में अब भी ताकते हो
किसी खामोश रास्ते से कोईआवाज़ आती है!


इन्तहा सर्द रातों में तुम अब भी छत पर जाते हो, 
फलक के सब सितारों को मेरी बातें सुनाते हो !


किताबों से तुमहारे इश्क में कोई कमी आई,
या मेरी याद की सीद्दत से आँखों में नमी आई ?


अजब पागल सी लड़की है मुझे हर ख़त में लिखती है !!


जवाबों में मैं उस को लिखता हूँ !


मेरी मुस्रूफियत तो देखो सुबह से शाम 
ऑफिस में मैं चिराग-ऐ-उमर जलाता हूँ !


फिर वक़्त मिलता है तो दुनियां की कई  
मजबूरियां पाऊँ में बेरी ड़ाल रखती हैं !


बूझे बेफिक्र चाहत है, बड़े सपने नहीं आते, 
टहलने,जागने,रोने की मोहल्लत नहीं मिलती !


सितारों से मिले तो अरसा हो गया,
नाराज़ हो शायद ! 


किताबों से दोस्ती मेरी अभी वैसे ही कम है, 
फर्क अब इतना है उन्हें अब अरसों में पढ़ता हूँ !


तुम्हे किस ने कहा पगली तुम्हे मैं याद करता हूँ ?


की मैं खुद को भुलाने की मुस्तकिल जुस्तजू है,
मगर यह जुस्तुजू मेरी बहुत नाकाम रहती है !


तुम्हे किस ने कहा पगली तुम्हे में याद करता हूं ? 


मेरे दिन रात में अब भी तुम्हारी शाम रहती है, 
मेरे लफ्ज़ो की हर माला तुम्हारे नाम रहती है !


तुम्हे  किस ने कहा पगली तुम्हे मैं याद करता हूँ ?


पुरानी बातें है जो लोग अक्सर गुनगुनाते हैं,
उन्हे हम याद करते है जिन्हे हम भूल जाते है !


तुम्हे दील से भुलाऊँ ,तो तुम्हारी याद आए ना ?


तुम्हे दिलसे भुलाने की मुझे फुर्सत नहीं मिलती,और
इस मसरूफ जीवन मैं तुम्हे ख़त का एक जुम्ला,
तुम्हे  मेरी  याद  आती  है ?


मेरी चाहत की सिद्त्त, मैं कमी होने नहीं देता 
बहुत रातें जगाता है मुझे सोने नहीं देता ,
अगली बार अपने ख़त में यह जुम्ला नहीं लिखना !


अजब पागल सी लड़की है मुझे फिर भी यह लिखती है !


मुझे तुम याद करते हो, तुम्हे मेरी याद आती है? 
मुझे तुम याद करते हो, तुम्हे मेरी याद आती है? 
मुझे तुम याद करते हो,तुम्हे मेरी याद आती है? 


ओ कैसी पागल लड़की है,मुझे फिर भी लिखती है ,
ओ एक पागल लड़की है मुझे फिर भी लिखती है !
अजब पागल लड़की है, मुझे हर ख़त में लिखती है !
मुझे तुम याद करते हो , तुम्हे मेरी याद आती है ?
.......................mishra ......................................!!